बहादुरपुर में श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाहरवीर गोगाजी महाराज का जन्मोत्सव
इटावा एक्सप्रेस सम्पादक राजीव यादव

बहादुरपुर में श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाहरवीर गोगाजी महाराज का जन्मोत्सव 
सैफई : हैवरा बहादुरपुर स्थित गोगाजी मंदिर पर शनिवार को गोगा नवमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। सुबह हवन-पूजन के साथ शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठानों के बाद देर रात तक भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। महिलाओं ने गोगाजी महाराज के भजनों का गुणगान कर जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।
गोगाजी राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता हैं, जिन्हें जाहरवीर गोगाजी के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी में भाद्रगोगाजी राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता हैं, जिन्हें जाहरवीर गोगाजी के नाम से भी जाना जाता है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी में भाद्रपद शुक्ल नवमी पर उनका प्रसिद्ध मेला लगता है। राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी गोगा नवमी पर श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। गोगाजी की आराधना में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था जुड़ी है। लोकमान्यता के अनुसार, गोगाजी को सर्पों का देवता माना जाता है। उनकी पूजा करने से सर्पदंश का भय नहीं रहता। इसी मान्यता के चलते गोगा नवमी पर नागदेवता और बांबी की भी पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूजा स्थल की मिट्टी को घर में रखकर सर्पभय से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ के वरदान से गोगाजी का जन्म हुआ था। निसंतान रानी बाछल देवी की भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु गोरखनाथ ने उन्हें अभिमंत्रित गूगल फल दिया था, जिसके प्रसाद से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई।पद शुक्ल नवमी पर उनका प्रसिद्ध मेला लगता है। राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी गोगा नवमी पर श्रद्धालु उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। गोगाजी की आराधना में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था जुड़ी है। लोकमान्यता के अनुसार, गोगाजी को सर्पों का देवता माना जाता है। उनकी पूजा करने से सर्पदंश का भय नहीं रहता। इसी मान्यता के चलते गोगा नवमी पर नागदेवता और बांबी की भी पूजा की जाती है। श्रद्धालु पूजा स्थल की मिट्टी को घर में रखकर सर्पभय से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ के वरदान से गोगाजी का जन्म हुआ था। निसंतान रानी बाछल देवी की भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु गोरखनाथ ने उन्हें अभिमंत्रित गूगल फल दिया था, जिसके प्रसाद से उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई।
पर्व पर श्रद्धालुओं ने मिट्टी की मूर्ति और नीले घोड़े पर सवार गोगाजी के चित्र का रोली, चावल, पुष्प और गंगाजल से पूजन किया। खीर, चूरमा और गुलगुले का भोग लगाया गया। नीले घोड़े को चने की दाल अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने गोगाजी की कथा का श्रवण कर नागदेवता और बांबी की पूजा की तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस मौके पर सुघर सिंह पत्रकार, नितुल प्रताप यादव, सुरेंद्र यादव, वीपी सिंह यादव पत्रकार, पिंकू यादव आदि तमाम भक्तों ने जाहरवीर मंदिर में पूजा अर्चना की।




